प्रस्तावना (Intro)
माँ का प्रेम इस दुनिया का सबसे पवित्र और निस्वार्थ प्रेम होता है। माँ अपने बच्चों के जीवन को रोशनी से भर देती है और हर कठिनाई से बचाती है। महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी ने माँ के महत्व को बहुत सुंदर शब्दों में व्यक्त किया है।
निराला जी की कविता
"माँ अपने आलोक निखारो, नर को नरक-त्रास से वारो।
पल्लव में रस, सुरभि सुमन में, फल में दल करलव उपवन में,
लाओ चारु चमन चितवन में, स्वर्ग धरा के कर तुम धारो।"
— निराला जी
कविता का सरल अर्थ
इन पंक्तियों में कवि माँ से प्रार्थना कर रहे हैं कि वह अपने प्रकाश से मानव जीवन को सुंदर बनाएं और उसे दुखों से बचाएं। माँ की ममता जीवन को स्वर्ग जैसा बना सकती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
माँ का स्थान जीवन में सबसे ऊँचा होता है। हमें हमेशा अपनी माँ का सम्मान करना चाहिए और उन्हें यह महसूस कराना चाहिए कि वे हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण हैं। ❤️
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें