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शनिवार, 5 मई 2012

माँ का प्यार फिर याद आया।

माँ एक  सुखद अहसास है,
जो अपने  में  ही  कुछ  खास  है ,
जब जब दुःख पड़ता खुद पर,
'माँ' नाम  आता जुबान पर,
माँ की गोद मे स्वर्ग  लगता है,
हर माँ में रब बसता है,
माँ का साया रहने से, 
बूढ़े भी बच्चे लगते है ,
लेकिन बिन  माँ के बच्चे भी,
बूढ़े बन जाते है,
माँ का प्यार जवां रहता  है ऊम्र  भर,
बिन माँ के कट भी नहीं पाता एक भी पल,
आज फिर मन भर आया क्योंकि,
माँ का प्यार फिर याद आया।

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