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शनिवार, 24 अप्रैल 2010

माँ तू है !


कानों में मधुर
राग रागिनी
खिलखिलाती झनक
जीवन सफ़र की
अंतरंग सहेली
माँ तू है!

आँखों में बसी
रूप रोशनी
मरहम-सी छुवन
कड़ी धूप में
छाँव शीतल
माँ तू है!

खुशबू-सी पावन
मुस्कुराता गगन
साए में दर्द के
हँसने की लगन
सुलझी पहेली
माँ तू है!

एक मीठा स्वाद
सुंदर अहसास
डगमगाते क्षणों में
स्थिर विश्वास
सागर अथाह
माँ तू है!

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