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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

माँ के आगे सारा जग छोटा है !


चोट लगे तो मेरे तन में,
होती है सच पीर बड़ी
पर माँ की आँखों से धारा,
बह उठती है बहुत बड़ी

लगता माँ का फूलों-सा मन,
अति व्याकुल हो जाता है
इस दुनिया में माँ के मन-सा
कोई जोड़ न पाता है

अगर छुपे हैं माँ के आँचल
स्वर्ग न कुछ भी होता है
माँ की ममता के आगे तो,
सारा जग भी छोटा है

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